POET: प्रदीप - Pradeep

खिलौना माटी का – प्रदीप | Khilona Maati Ka – Pradeep

तूने खूब रचा भगवान्खिलौना माटी काइसे कोई ना सका पहचानखिलौना माटी का वाह रे तेरा इंसान विधाताइसका भेद समझ में ना आताधरती से है इसका...

अपनी माँ की किस्मत पर मेरे बेटे तू मत रो – प्रदीप | Apni Maa Ki Kismat Par Mere Bete Tu Mat Ro –...

अपनी माँ की किस्मत पर मेरे बेटे तू मत रोमैं तो काँटों में जी लुंगी जा तू फूलों पर सोअपनी माँ की किस्मत पर... तू...

चरागों का लगा मेला ये झांकी खूबसूरत है – प्रदीप | Charagon Ka Laga Mela Ye Jhanki Khoobsurat Hai – Pradeep

चरागों का लगा मेला ये झांकी खूबसूरत हैमगर वो रौशनी है कहाँमुझे जिसकी जरुरत हैये ख़ुशी लेके मैं क्या करूँमेरी है अब तलक रात...

मैं एक नन्हा सा मैं एक छोटा सा बच्चा हूँ – प्रदीप | Main Ek Nanha Sa Main Ek Chhota Sa Bachcha Hoon –...

मैं एक नन्हा सा मैं एक छोटा सा बच्चा हूँतुम हो बड़े बलवानप्रभु जी मेरी लाज रखोमैं एक नन्हा सा मैंने सुना है तुमने यहाँ...

चलो चलें मन सपनो के गाँव में – प्रदीप | Chalo Chalen Mann Sapno Ke Gaon Mein – Pradeep

चलो चलें मन सपनो के गाँव मेंकाँटों से दूर कहीं फूलों की छाँव मेंचलो चलें मन... हो रहे इशारे रेशमी घटाओं मेंचलो चलें मन... आओ चलें...

होने लगा है मुझ पे जवानी का अब असर – प्रदीप | Hone Laga Hai Mujh Pe Jawani Ka Asar – Pradeep

होने लगा है मुझ पे जवानी का अब असरझुकी जाए नज़रदेखो छलक पड़ी है मेरे रूप की गागरझुकी जाए नज़र हो झुकी जाए नज़र इक...

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