POET: Poets

उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम – प्रदीप | Uttar Dakshin Purab Paschim – Pradeep

उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिमजिधर भी देखूं मैंअंधकार अंधकारअँधेरे में जो बैठे हैंनज़र उन पर भी कुछ डालोअरे ओ रौशनी वालोबुरे इतने नहीं हैं हमजरा...

किस बाग़ में मैं जन्मा खेला – प्रदीप | Kis Baag Mein Main Janma Khela – Pradeep

किस बाग़ में मैं जन्मा खेलामेरा रोम रोम ये जानता हैतुम भूल गए शायद मालीपर फूल तुम्हे पहचानता हैजो दिया था तुमने एक दिनमुझे...

तुमको तो करोड़ो साल हुए – प्रदीप | Tumko Toh Karodo Saal Hue – Pradeep

तुमको तो करोड़ो साल हुए बतलाओ गगन गंभीरइस प्यारी प्यारी दुनिया में क्यूँ अलग अलग तक़दीर मिलते हैं किसी को बिन मांगे ही मोतीकोई मांगे...

चल अकेला चल अकेला चल अकेला – प्रदीप | Chal Akela Chal Akela Chal Akela – Pradeep

चल अकेला चल अकेला चल अकेलातेरा मेल पीछे छूटा राही चल अकेला हजारों मील लम्बे रस्ते तुझको बुलातेयहाँ दुखड़े सहने के वास्ते तुझको बुलातेहै कौन...

हमने जग की अजब तस्वीर देखी – प्रदीप | Humne Jag Ki Ajab Tasveer Dekhi – Pradeep

हमने जग की अजब तस्वीर देखीएक हँसता है दस रोते हैंये प्रभु की अद्भुत जागीर देखीएक हँसता है दस रोते हैं हमे हँसते मुखड़े चार...

देख तेरे संसार की हालत – प्रदीप | Dekh Tere Sansar Ki Haalat – Pradeep

देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवान्कितना बदल गया इंसान कितना बदल गया इंसानसूरज न बदला चाँद न बदला न बदला रे...

Subscribe to our newsletter

Stay updated with all the latest poetries.

- ADVERTISEMENT -