POET: द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी - Dwarika Prasad Maheshwari

उठो धरा के अमर सपूतो – द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी | Utho Dhara Ke Amar Saputon – Dwarika Prasad Maheshwari

उठो धरा के अमर सपूतोपुनः नया निर्माण करो।जन जन के जीवन में फिर सेनई स्फूर्ति, नव प्राण भरो। नया प्रात है, नई बात है,नई किरण...

वीर तुम बढे चलो – द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी | Veer Tum Badhe Chalo – Dwarika Prasad Maheshwari

वीर तुम बढ़े चलोधीर तुम बढ़े चलो साथ में ध्वजा रहेबाल दल सजा रहेध्वज कभी झुके नहींदल कभी रुके नहींसामने पहाड़ होसिंह की दहाड़ होतुम...

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