POET: श्रीप्रसाद | Shriprasad

सुबह – श्रीप्रसाद | Subah – Shriprasad

सूरज की किरणें आती हैं,सारी कलियाँ खिल जाती हैं,अंधकार सब खो जाता है,सब जग सुन्दर हो जाता है चिड़ियाँ गाती हैं मिलजुल कर,बहते हैं उनके...

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