POET: Poets

कविता की पुकार – रामधारी सिंह “दिनकर” | Kavita Ki Pukaar – Ramdhari Singh “Dinkar”

आज न उडु के नील-कुंज में स्वप्न खोजने जाऊँगी,आज चमेली में न चंद्र-किरणों से चित्र बनाऊँगी।अधरों में मुस्कान, न लाली बन कपोल में छाउँगी,कवि !...

गीतवासिनी – रामधारी सिंह “दिनकर” | Geetvasini – Ramdhari Singh “Dinkar”

सात रंगों के दिवस, सातो सुरों की रात,साँझ रच दूँगा गुलावों से, जवा से प्रात। पाँव धरने के लिए पथ में मसृण, रंगीन,भोर का दूँगा...

प्रेम का सौदा – रामधारी सिंह “दिनकर” | Prem Ka Sauda – Ramdhari Singh “Dinkar”

सत्य का जिसके हृदय में प्यार हो,एक पथ, बलि के लिए तैयार हो । फूँक दे सोचे बिना संसार को,तोड़ दे मँझधार जा पतवार को...

हिमालय – रामधारी सिंह “दिनकर” | Himalaya – Ramdhari Singh “Dinkar”

मेरे नगपति! मेरे विशाल!साकार, दिव्य, गौरव विराट्,पौरूष के पुन्जीभूत ज्वाल!मेरी जननी के हिम-किरीट!मेरे भारत के दिव्य भाल!मेरे नगपति! मेरे विशाल!युग-युग अजेय, निर्बन्ध, मुक्त,युग-युग गर्वोन्नत,...

मंगल-आह्वान – रामधारी सिंह “दिनकर” |Mangal Ahwahan – Ramdhari Singh Dinkar

भावों के आवेग प्रबलमचा रहे उर में हलचल। कहते, उर के बाँध तोड़स्वर-स्त्रोत्तों में बह-बह अनजान,तृण, तरु, लता, अनिल, जल-थल कोछा लेंगे हम बनकर गान। पर,...

Parichay – Ramdhari Singh “Dinkar” | परिचय – रामधारी सिंह “दिनकर”

परिचय कविता Parichay Poem सलिल कण हूँ, या पारावार हूँ मैंस्वयं छाया, स्वयं आधार हूँ मैंबँधा हूँ, स्वप्न हूँ, लघु वृत हूँ मैंनहीं तो व्योम...

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