तुम चलो तो सही – नरेंद्र वर्मा | Tum Chalo Toh Sahi – Narendra Verma

राह में मुश्किल होगी हजार,तुम दो कदम बढाओ तो सही,हो जाएगा हर सपना साकार,तुम चलो तो सही, तुम चलो तो सही। मुश्किल है पर इतना भी नहीं,कि तू कर ना सके,दूर है मंजिल लेकिन...

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तुम चलो तो सही – नरेंद्र वर्मा | Tum Chalo Toh Sahi – Narendra Verma

राह में मुश्किल होगी हजार,तुम दो कदम बढाओ तो सही,हो जाएगा हर सपना साकार,तुम चलो तो सही, तुम चलो तो सही। मुश्किल है पर इतना भी नहीं,कि तू कर ना सके,दूर है मंजिल लेकिन इतनी भी नहीं,कि तु पा...

हो गये हैं स्वप्न सब साकार कैसे मान लें – Ho Gaye Hai Swapna Sab Sakar

हो गये हैं स्वप्न सब साकार कैसे मान लें हम।टल गया सर से व्यथा का भार कैसे मान लें हम। आ गया स्वातंत्र्य फिर भी चेतना आने न पाई।प्रगति के ही नाम श्रध्दा और श्रम को दी विदाई।इस भयंकर...

दीपक जलता रहा रात भर – गोपाल सिंह नेपाली | Deepak Jalta Raha Raat Bhar – Gopal Singh Nepali

एकदुख की घनी बनी अँधियारीसुख के टिमटिम दूर सितारेउठती रही पीर की बदलीमन के पंछी उड़-उड़ हारेबची रही प्रिय आँखों सेमेरी कुटिया एक किनारेमिलता रहा स्नेह-रस थोड़ादीपक जलता रहा रात भर दो दुनिया देखी भी अनदेखीनगर न जाना, डगर न...

हिमालय से भारत का नाता – गोपाल सिंह नेपाली | Himalay Se Bharat Ka Naata – Gopal Singh Nepali

इतनी ऊँची इसकी चोटी कि सकल धरती का ताज यहीपर्वत से भरी धरा पर केवल पर्वतराज यहीअंबर में सिर, पाताल चरणमन इसका गंगा का बचपनतन वरण वरण मुख निरावरणइसकी छाया में जो भी है, वह मस्तक नहीं झुकाता हैगिरिराज हिमालय...

उठो धरा के अमर सपूतो – द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी | Utho Dhara Ke Amar Saputon – Dwarika Prasad Maheshwari

उठो धरा के अमर सपूतोपुनः नया निर्माण करो।जन जन के जीवन में फिर सेनई स्फूर्ति, नव प्राण भरो। नया प्रात है, नई बात है,नई किरण है, ज्योति नई।नई उमंगें, नई तरंगे,नई आस है, साँस नई।युग युग के मुरझे सुमनों...

कोयल – सुभद्रा कुमारी चौहान | Koyal – Subhadra Kumari Chauhan

देखो कोयल काली हैपर मीठी है इसकी बोलीइसने ही तो कूक–कूक करआमों में मिसरी घोली कोयल कोयल सच बतलाओक्या संदेशा लाई होबहुत दिनों के बाद आज फिरइस डाली पर आई हो क्या गाती हो किसे बुलातीबतला दो कोयल रानीप्यासी धरती...

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उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम – प्रदीप | Uttar Dakshin Purab Paschim – Pradeep

उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिमजिधर भी देखूं मैंअंधकार अंधकारअँधेरे में जो बैठे हैंनज़र उन पर भी कुछ डालोअरे ओ रौशनी वालोबुरे इतने नहीं हैं हमजरा...

विजयी के सदृश जियो रे – रामधारी सिंह दिनकर | Vijayi Ke Sadrish Jiyo Re – Ramdhari Singh Dinkar

वैराग्य छोड़ बाँहों की विभा संभालोचट्टानों की छाती से दूध निकालोहै रुकी जहाँ भी धार शिलाएं तोड़ोपीयूष चन्द्रमाओं का पकड़ निचोड़ो चढ़ तुंग शैल शिखरों...

अमृत और ज़हर दोनों हैं सागर में एक साथ – प्रदीप | Amrit Aur Zehar Dono Hain Sagar Mein Ek Sath – Pradeep

अमृत और ज़हर दोनों हैं सागर में एक साथमंथन का अधिकार है सबको फल प्रभु तेरे हाथतेरे फूलों से भी प्यारतेरे काँटों से भी...

कभी कभी खुद से बात करो – प्रदीप | Kabhi Kabhi Khud Se Baat Karo – Pradeep

कभी कभी खुद से बात करो, कभी खुद से बोलो।अपनी नज़र में तुम क्या हो? ये मन की तराजू पर तोलो।कभी कभी खुद से...

न जाने आज किधर – प्रदीप | Na Jaane Aaj Kidhar – Pradeep

न जाने किधर आज मेरी नाव चली रेन जाने किधर आज मेरी नाव चली रेचली रे चली रे मेरी नाव चली रेचली रे चली...

परदे में क़ैद औरत की गुहार – भारतेंदु हरिश्चंद्र | Parde Mein Kaid Aurat Ki Guhar – Bharatendu Harishchandra

लिखाय नाहीं देत्यो पढ़ाय नाहीं देत्यो।सैयाँ फिरंगिन बनाय नाहीं देत्यो॥लहँगा दुपट्टा नीको न लागै।मेमन का गाउन मँगाय नाहीं देत्यो।वै गोरिन हम रंग सँवलिया।नदिया प...

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